एक शिक्षिका तथा उसकी दोस्त के साथ ज़ोरदार मौज हुई।
एक बार मैंने अपनी शिक्षिका के साथ संबंध बनाया। वो खुश हुईं, फिर कहा कि उनकी दोस्त के साथ भी ऐसा करो। मैंने ठीक है कह दिया।.
सनी सिंह कहलाता हूं मैं। रायपुर, छत्तीसगढ़ में पले-बढ़े हैं मेरे पैर।
उम्र तेइस के आसपास है, चेहरा कुछ खास नहीं पर बुरा भी नहीं।
लंबाई से ज़्यादा असर तय करती है मेरे लिंग का घटना।
मुझे जो लड़कियाँ मेरी तुलना में थोड़ी बड़ी होती हैं, उन्हें पसंद करने का आग्रह रहता है।
जिन-जिन के साथ मैंने अब तक सेक्स किया है, उन सबके किस्से मैं आपके लिए बताता जाऊंगा।
जिस लड़की को कहानी सुनने पर खुजली महसूस हो, वह मेरे पास डाक के जरिये संपर्क कर सकती है। अगर भाभी को भी ऐसा लगे तो बेझिझक पत्र भेज सकती हैं।
मेरी कोशिश होगी कि मैं उसे बता पाऊँ कैसे छुटकारा पाएं चूत की खुजली से।
मेरी कहानी सुन ली है तो
केमिस्ट्री वाली मेम की होटल रूम में चुदाई
अगर कहानी अभी तक नहीं पढ़ी है, तो पहले वो पढ़ लेना। फिर इस फ्री Xxx सेक्स कहानी का आनंद उठाना, क्योंकि ये पिछली कहानी से जुड़ी है। एक शाम मैं सोनम मैम के साथ सोया हुआ था।
थोड़ी देर बाद मैं मैम के पास ही जगह बनाकर लेट गया।
इसके बाद मैम ने पूनम की बात छेड़ी, जो उनकी कॉलेज की दोस्त है, फिर आगे बढ़कर यह भी बताया कि वो भी हम लोगों के साथ ऐसे ही मजे करना चाहती है।
सवाल उठा मेरे मन में - क्या पूनम की नज़र हर बात पर है?
हां! मैम ने कहा - पूनम मेरी पुरानी सहेली है। वो मेरे साथ जो भी बात होती है, उसे छिपाती नहीं। उधर, मैं भी उसके सामने कुछ नहीं छुपाती।
फिर मैंने कहा - अगर तुम्हें या पूनम को कोई ऐतराज़ नहीं है, तो मैं भी शामिल हो सकता हूँ। इस तरह मेरे हाथ एक नयी चूत लग जाएगी, वैसे भी दोनों के साथ मिलकर चुदाई करने में मज़ा आएगा।
बस इतना कहते ही वो मेरे लंड को हाथ में लिया और सॉफ्ट तरीके से चूसने लगी।
थोड़ी देर चूसने के बाद मेरा लिंग खड़ा हो गया, अब वो पूरा तैयार था। मैंने उसे बिस्तर पर पेट के बल लिटा दिया। फिर कमर के नीचे एक तकिया रख दिया।
उसके बाद मैंने मैम की चूत को जीभ से नम किया, फिर धीरे से अपना लंड उसके भीतर घुसा दिया।
कुछ पलों तक तेज़ धमाल के बाद मैंने अपना सारा शहद उसकी गर्म चूची में उड़ेल दिया, फिर उसके ऊपर ढहता हुआ विश्राम में आ गया।
हम दोनों का पसीना छूट रहा था, मानो बारिश हो रही हो।
अब हम अलग-थलग पड़ गए, फिर बाथरूम में साथ चले, वहाँ एक-दूसरे की सफाई की।
थोड़ी देर पहले जिस बात का ज़िक्र था, वो पूनम से जुड़ी है।
उम्र उसकी 27 साल है, पूनम जिंदगी को खुले दिमाग से देखती है।
उसकी खूबसूरती पहली नज़र में ही चमक उठती है, रंग गोरा है। लगभग 34-28-30 के आसपास तो वो फिट बैठती है।
उसकी पूरी छवि में कोई ज़बरदस्त खींचाव है।
चलो, कहानी की बात करें।
अगली सुबह, जब मैंने खुद को तैयार पाया, तो मैम के घर चल दिया।
मैम अकेली थी।
घरवाले किसी काम से बाहर हैं, ऐसा उन्होंने कहा। दो दिन में वापस पहुँचेंगे।
अचानक बात समझ में आई। मम्मी के दिमाग में यह खेल कैसे आया होगा।
फ़ोन की घंटी बजी, मैम थीं दूसरी छोर पर।
तब मैम ने पूनम से बातचीत शुरू कर दी, मैं वहीं सोफे पर जमा हुआ था।
बातचीत के कुछ पल बाद, मैम ने सुन्न होकर फोन रख दिया। वह चुपचाप मेरे पास आकर बैठ गईं।
घर से बाहर निकल चुकी थी पूनम, मैम ने कहा - थोड़ी देर में आ जाएगी। फिर मैंने उन्हें गले लगा लिया, हम दोनों एक-दूसरे के साथ किस करने लगे।
थोड़ी देर तक जुबानें लड़ाने के बाद मैंने मैम के अंदर हाथ डाल दिया। फिर धीरे-धीरे उंगली से वहाँ आगे पीछे करने लगा।
उस वक्त मैम ने मुझे सहारा देना शुरू कर दिया, जब मैंने उन्हें गले लगाया।
तभी जब मम्मी के साथ मेरा रोज़ाना का काम शुरू होने वाला था, तभी किसी ने दरवाज़े पर धड़ाका दिया।
फिर टीचर बोलीं - हो सकता है, पूनम आ चुकी हो।
फिर माँ उठीं, और दरवाज़ा खोलने के लिए बढ़ गईं।
सोफे पर जब मैं बैठा हुआ था।
अंदर कदम रखते ही पूनम, मेरी नज़र सीधे उस पर जा टिकी।
पूनम को देखते हुए मेरी नजर ठहर गई, मानो अब उठकर कुछ कर बैठूँगा।
सफ़ेद लेगिंग में पूनम का रंग जबरदस्त लग रहा था। ऊपर से उसने एक गुलाबी कुर्ता ओढ़ रखा था।
उसका रूप देखकर मन में परी की याद आई।
उसकी ओर नज़र पड़ते ही मन भटक गया था मेरा।
उसके सामने जाकर पूनम बोली - कहाँ खो गए थे आप? मगर मैंने कुछ भी नहीं कहा, सिर्फ़ वापस देखा।
सोफे पर वह मेरे सामने आकर बैठ गई।
आँखें सिर्फ पूनम पर टिकी थीं।
उस पल पूनम को एहसास हो गया था - मेरी नज़र किस पर टिकी है।
उसके बाद मैम कुछ पीने के लिए रसोईघर से ठंडा पेय लेकर आए।
बैठ गए हम, कोल्ड ड्रिंक का घूँट भरते हुए।
उसकी तरफ हल्के से सिर हिलाया, जैसे कह रहा हो - यहाँ आओ।
अभी पूनम बगल में जगह लेने वाली थी, तभी मैंने उसका हाथ थाम लिया। मैंने कहा, गोद में आकर बैठ जाओ। उसकी आँखों में चमक आ गई, मुस्कुराहट फैल गई। वो झट से मेरी ओर घूमी, धीरे से बैठ गई।
पूनम के पास मैम बैठी थी। उसने कहा, "इतनी जल्दी शुरू कर दोगी क्या?" एक पल रुककर बोलीं, "थोड़ा कोल्ड ड्रिंक पी लो।" फिर मुस्कुराते हुए बोलीं, "अभी-अभी आई हो। आते ही सब चालू करने की सोच रखती हो?"?
इतना सुनकर मैम पलभर में हंसने लगी।
पूनम बोली – सच कहूँ तो, तुम्हारे सनी का असर इतना जबरदस्त है कि ठहर पाना मुश्किल हो गया। वही वजह है कि मुझे झट से गोद में उठा लिया था।
हँसते-हँसते मैम का चेहरा लाल हो गया, पूनम ने आँखें पटक दीं।
थोड़ी देर पहले ही तो मैंने उसे गोद में बिठाया है, पूनम। जल्द ही ऐसा होगा कि तुम्हें कहीं और जगह ढूंढनी पड़ेगी।
फिर वहाँ पर हँसी का दौर शुरू हो गया, तीनों के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
इसके बाद मेरा होठ पूनम की गर्दन से जुड़ गया।
उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे मेरे बालों में फंसी थीं, पूनम चुपचाप पास बैठी थी।
उसके बाद मैंने पूनम से कहा, कमरे की तरफ बढ़ते हैं।
पूनम को गोद में उठाए हुए, मैं कमरे की ओर चल पड़ा।
पीछे-पीछे कमरे में वो भी चल पड़ी।
उसकी पीठ के नीचे हथेलियाँ सरकती रहीं, मैंने धीमे से उसके मुँह को छुआ।
पूनम को ऐसा लगने लगा जैसे वह बादलों पर टहल रही हो, मेरे साथ हँसते हुए।
कभी-कभी पून मेरी जुबान को चूस लेती। वहीं मैं किसी पल उसकी जुबान पर होता।
उठते हुए मैंने पूनam से दूर हटकर कुर्ती व लेगिंग बिस्तर से अलग की।
पूनम काले रंग की ब्रा में दिख रही थी, उसके साथ पैंटी भी वैसी ही थी।
जैसे ही मैंने पूनम की ब्रा उतारी, वो झेंपकर चेहरा छिपा ली।
उसकी छाती पर होंठ फिर गए, जैसे कहीं खो गए हों।
उसकी हर सांस में मेरा नाम था।
मुझे उसके बूब्स चूसने में अच्छा लग रहा था, पूनम हल्के से हंसते हुए खुद भी इसका आनंद ले रही थी।
होंठ दबाये, पूनम वहीं खड़ी थी।
एक हाथ को धीरे से नीचे उतारकर मैंने पूनम की पैंटी के ऊपर से उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया।.
गुस्सा उठते ही पूनम का तापमान बढ़ने लगा।
गीलापन पूनम की पैंटी में फैल चुका था।
पूनम के स्तन चूसते हुए मैंने अपनी उंगली धीरे से उसकी योनि में डाल दी।
उसी पल, आवाज़ सुनकर हम दोनों की नज़रें मैम की ओर उठ गईं।
वह महिला बिल्कुल नंगी थी, अपनी चूत में उंगली डाल रही थी।
उसकी तरफ नज़रें घुमाकर मैंने उन्हें पास आने का संकेत दिया।
उठते ही मैम सीधे बिस्तर पर चली गईं।
अपने सभी कपड़े उतारकर मैं बिस्तर पर लेट गया। पूनम को देखकर बोला, आज तेरा नंबर है लंड चुसने का।
एक सिर हिलावट के बाद वह मुस्कान फैला चुकी थी, धीमे-धीमे जमीन पर उतरकर जांघों के ऊपर टिक गई।
उसके बाद पूनम ने धीरे से लण्ड को अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया।
उसकी त्वचा के स्पर्श में कुछ ऐसा था, जैसे पूनम का हाथ मेरे लिए रास्ता खोल दे। महसूस हुआ, जैसे आसमान छू लिया हो।
उसके बाद पूनम ने लंड को कई बार ऊपर-नीचे हिलाया, ठीक ऐसे जैसे कोई मुट्ठी चलाता है।!
तुरंत बाद पूनम ने लिंग को मुँह में लिया, फिर वह झट से एक भूखी जानवर की तरह चूसने लगी।
उसने पास बैठकर मेरे गाल पर कोमलता से होंठ रख दिए।
मैंने धीरे से मैम के स्तनों पर हाथ रखा, फिर उसके गालों पर किस किया।
उसकी चोत में मेरी उंगली समा गई।
मैंने धीरे-धीरे मैम की चूत में उँगली अंदर की।
एक बार मैंने कहा, सुनिए मैम… वो पूनम का चूत चाट लीजिए।!
पूनम ने अपनी माँ को चूत चाटते हुए पकड़ लिया।
लंबे अंतराल के बाद पूनम के होठों का ज़ोरदार खेल शुरू हुआ।
अँधेरे में आंखें बंद किए हुए था, धीरे-धीरे सब कुछ भूलता जा रहा था।
थोड़ी देर में ऐसा लगा कि अब खत्म होने वाला हूँ। मैंने पूनम के चेहरे को पकड़ लिया, फिर उसे तेजी से ऊपर-नीचे करने लगा। धीरे से बोला - जान, मेरा आ रहा है… पूरा पी ले, एक बूँद भी बाहर नहीं जानी चाहिए।
सिर हिलाते हुए पूनम ने हाँ कह दिया।
पूनम के होठों पर सब कुछ फैल गया।
उसने सारा माल पी लिया, इसके बाद लंड को अच्छे से चाटकर चमकदार बना दियa।
मेरा लंड अब पूरी तरह से चुदाई को तैयार था।
मैं उठकर पूनम को धीरे से लिटा दियa, फिर उसकी चूत पर मुँह ले गया। तभी मैम ने मेरे लंड को हाथ में लिया और चूसने लगी।
बारिश हो चुकी थी पूनम के मन से।
गोरी चमड़ी वाली उसकी चूत पर हल्के-हल्के रोएं थे।
अब मैं ने चूत पर होठों का काम शुरू किया, साथ में धीमे से अंदर एक उंगली सरका दी।
अब समय आ गया था, पूनम के पानी बहने का।
उठकर मैंने एकदम से लंड को पूनम की चूत में धँसा दिया।
सांस के साथ पूनम के होंठों से एक धीमी आह निकल पड़ी।
हो सकता है पूनम को अचानक डालने पर थोड़ी मुस्किल महसूस हुई हो।
मैं पूनम को तेजी से धक्के दे रहा था। वहीं मैम उल्टी बैठकर अपनी चूची उसके मुँह में ठूंस रही थी।
लगभग 10 से 15 तेज हिलने के बाद पूनम, मैं व मैम एकसाथ ढह गए।
पानी को मैम जब तक संभाल पाती, पूनम हड़प चुकी थी।
उसकी चूत में मेरा सारा माल उड़ेल दिया।
अलग होते ही मैं बिस्तर पर लेट गया, पूनम के बगैर।
एक ओर पूनम बैठी थी, दूसरी तरफ मैम।
मैम ने पूछा, "तुझे कैसा लगा?" - पूनम सुनकर थोड़ी देर चुप रही।?
मेरे होंठों पर उसका स्पर्श आया, फिर वह बोली - जो तूने कहा था, उससे कहीं बेहतर लगा।!
उसने मेरा हाथ पकड़ा, धीरे-धीरे हिलाया।
वो सुबह-सुबह पूनम मेरे गाल पर हल्का सा चुम्मा देने लगी।
मुझे उन दोनों के अंदाज़ ने तुरंत भड़का दिया, फिर मेरा लंड खड़ा होने लगा।
ऊपर चढ़ते हुए मैंने मैम पर अपना वजन डाला, लड्डू उसकी चोतड़िया में जाते ही एक साथ भीतर खिसक गया।
मैंने धीरे-धीरे माँ के साथ संभोग शुरू कर दिया।
पहले तो पूनम मैम ने मना किया, फिर हाँ कर दिया। उसके बाद वो खुद भी चाहने लगी।
इसके बाद मैम ने पूनम से कहा - मुझे तुम्हारी चूत चखनी है।
जैसे ही मैम ने आवाज़ उठायी, पूनम सीधे उनके चेहरे पर जा बैठी।
मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं मैम के साथ बार-बार शारीरिक संबंध बना रहा हूँ।
पूनम मैम के सामने बैठकर वह उनकी चूत चुस रही थी।
थोड़ी देर बाद, लगभग पंद्रह से बीस मिनट में, मेरा निकलने का समय हो गया।
उस वक्त तक मैम का झड़ना हो चुका था। लंड मैम की चूत से बाहर आया, मैं पूनम के सामने खड़ा था।
पूनम के मुँह में मेरा लंड जाने लगा, फिर मैं मुखचोदने लगा।
उस वक्त मैंने सारा सामान फिर से पूनम के मुँह में छोड़ दिया, और वो हर बूंद चूस गई।
तीनों ने जब फ्री में सेक्स किया, पास-पास चिपके हुए बिछड़ गए।
पूनम ने हम दोनों को धन्यवाद दिया, फिर मुस्कुराते हुए बोली - आज तुमने मुझे खूब सुख दिया है। यह पल मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा।
फिर पूनम बोली - जब भी मज़ा चाहिएगा, हम सब मिलकर उठाएंगे। सनी, तुम्हें जब मेरी गांड मारने का दिमाग आए, झट से बता देना, मैं हर वक्त तैयार हूं तुम्हारे लिए।!
तब हम तीनों ने धीरे-धीरे आँखें बंद कर ली।
उसके साथ पहला दिन बीता तो जैसे कुछ खटखटाहट हुई। फिर दूजे दिन ऐसा लगा जैसे धीरे-धीरे सब कुछ ढलने लगा।
उसके बाद से वो मेरे पास आने लगी।
तुम्हें वो कहानी पसंद आई, जिसमें मैम और उनकी दोस्त के साथ हुआ कुछ ऐसा था?
अगर इस कहानी पर तुम्हारे कोई ख्याल हैं, तो उन्हें मेरे पास ज़रूर पहुँचा देना।
अगली कहानी में, तुम्हारे सुझावों को अपनाऊँगा।
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