उस रात मैंने पापा के एक पुराने साथी को अपने साथ बिस्तर पर लेटते देखा।

Jan 7, 2026 - 12:18
Jan 8, 2026 - 16:46
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उस रात मैंने पापा के एक पुराने साथी को अपने साथ बिस्तर पर लेटते देखा।

शादी के बाद मेरे चाचा ने सुहागरात का इंतज़ाम किया। फिर हम दोनों को एक जगह ले गए। वहाँ मेरे पति को भरपूर शराब पिला दी गई। थोड़ी देर में वह बेहोश-सा हो गया।.

अरे भइयो, सुनो थोड़ा। प्रियंका आई हूँ मैं, गपशप के लिए।!

एक शाम की बात है, मेरी सुहागरात का दिन था।

तुमने देखी थी मेरी पिछली कहानी

मेरे पापा के दोस्त ने मुझे चोदा

पढ़ने में आया कि मेरे पिता के एक दोस्त, जिन्हें मैं अंकल कहती थी, ने मुझे उठाया था जब मैं सिर्फ 19 साल की थी। उसने मुझे धीरे-धीरे अपनी ओर खींचा, फिर मैं उसके लिए बस इस्तेमाल की चीज बन गई। एक शाम, जब वो मेरे ऊपर था, उसके बाद मैंने कह दिया - अब मेरी शादी तय हो चुकी है।.

फिर उसने कहा - सुन ले छिनाल, किसी से भी तेरी शादी हो जाए, तू मेरी है और रहेगी। सुहागरात मैं तेरे साथ मनाऊँगा, धत्तेरी!

मैं उनके पास जा लगी, कहा - अंकल जी, मैं तो आपकी हूँ, आपकी कुतिया बनकर रहूँगी, और सुहागरात भी आपी होगी।

शादी का फैसला सूरज के साथ तब तक टेढ़ा नहीं था, जब तक माँ ने कहा।.

शादी का सब कुछ अंकल ने सम्भाला। पापा के काम आए वो।

उस शादी के बाद मेरे लिए सुहागरात का इंतज़ाम चाचा ने अपने खेत के घर पर किया। अगरचे ऑफिशियली इसका नाम सूरज-प्रियंका की रात था… लेकिन आप भलीभाँति जानते हो कि वास्तविकता क्या थी।.

मेरी सुहागरात का पल था, ये Xxx दुल्हन की कहानी।.

अगले दिन, जब सभी रीति-रिवाज़ पूरे हो चुके थे, अंकल हमें - मुझे और सूरज को - फार्महाउस ले आए।

सजी-धजी खड़ी थी, दुल्हन जैसा वो पहरावा सब कुछ बयान कर रहा था।

एक कमरे में, फार्म हाउस पर, सुहागरात के लिए जगह बनाई गई थी।

फूलों की चादर बिछी थी सुहागरात के पलंग पर।

अचानक मेरे मुँह से निकला - वाह, इतनी खूबसूरत चीजें लगी हैं यहाँ।

सूरज ने कहा, "अंकल, तुम्हें इतनी परेशानी उठाने की ज़रूरत नहीं थी।"

बुजुर्ग ने कहा, सूरज पुत्र, इसमें कोई खास बात नहीं। वहाँ एक अन्य व्यवस्था भी है - सोमरस की।

बोल उठी मैं - सूरज जी, इतना अधिक मत पिए।!

उन्होंने कहा, प्रियंका, घबराओ मत।

बस एक सुहागरात का पल था, मैं वहीं टिक गई।

थोड़ी देर के बाद, सूरज को बिना होश के अंकल लाये।

सूरज को वो सोफे पर लेटा चुके थे। फिर बोले, प्रियंका भैंस की ओलाद… सुहागरात के लिए अब तैयार हो जा मेरी कमीनी!

हँसते-हँसते मैं उनके पास आ गई।

शुरू कर दिया वो मेरे होंठों पर।

उसके होंठों पर मेरी छाप समा गई, धीरे-धीरे सब कुछ घुलने लगा। बिना किसी रुकावट के मैं आगे बढ़ गया, जैसे सांस भी थम गई हो।.

मुझे लगा, उन्होंने मेरी जीभ को अपने में खींच लिया।

थोड़ी देर के बाद मैं एकले सुहागसेज पर जा बैठी। फिर बोली - अंकल जी, इधर आओ तो सही!

कमरे में अचानक सन्नाटा छा गया, जैसे किसी ने हवा को रोक दिया हो। फिर वह धीरे-धीरे कपड़े उतारने लगे। खाली पैरों से चलते हुए वह मेरी तरफ बढ़ने लगे।.

उसकी जांघों में हलचल थी… मेरी आँखें वहीं अटकी रहीं। मेरे भीतर गीलापन फैल गया।

मैंने अपना आंचल हटाया, फिर बिस्तर पर लेट गई। उसी वक्त अंकल मेरे ऊपर आ बैठे, धीरे से मेरे होंठों को छूने लगे।

उन्होंने मेरी माँ पर हमला कर दिया।

तब मुझे तपन सी महसूस हुई। पलकें झपकते ही मैं उनके शरीर से सट गई। सांस थमी, फिर कंपकंपी के साथ आवाज़ निकली - आहह हहह इश्सस ससआ हहह… एक पल बाद धीमे स्वर में छुपी खींच-सी - धीरे धीरे आह औह… गला सूखा, आवाज़ टूटी - नाअ अअअ… धीरे चलो अंकल जी… जलन हो रही है… ओउऊ… आह!

मैंने महसूस किया कि वो मेरी पैंटी के अंदर हाथ ले गए। फिर बिना रुके चूत में उँगलियाँ घुमाने लगे।.

मैं रोने लगी - आह… हा हा, इश्श…। कृपया मत करें ऐसा, चाचा!

मेरे होंठों के बीच उसकी उंगली आ गई, फिर मैंने धीरे से चूसना शुरू कर दिया।

उन्हें एहसास हो गया कि मैं सेक्स के लिए तैयार हूं।.

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फिर उन्होंने मेरे कपड़े जल्दी से खोल दिए, और मैं पूरी तरह बेढब हो गई। जैसे ही मैं अपने आभूषण निकालने लगी, वह बोले - आभूषण नहीं छोड़ने…इसी तरह शाम को सजीव बनाऊंगा।

मैंने कहा - अंकल जी, मेरी प्यास तुरंत बुझा दें। और अब ये सहन होना मुश्किल हो चुका था।!

फिर मैं उनके पास आ गई, शरीर सट गया।

उन्होंने कहा - अरे भई, तू तो मादा कुतिया है, अब तोड़कर चढ़ाई के लिए तैयार नजर आ रही है। पहले गांडू घोटाले में जमकर लंड चूस ले!

एकदम अचानक मेरी शक्ल ही बदल गई, फिर मैं कुतिया बन चुकी थी। धीरे से उसके लंड पर जीभ घुमाने लगी, कोई सोच नहीं सकता था।

कभी-कभी तो वो इतना सख्त हो जाता है कि मेरे होश उड़ जाते हैं। घंटों तक छूने के बाद भी थकान महसूस नहीं होती।.

अचानक मैंने कह दिया - वाह अंकल, क्या शानदार लंड है… आज रात सुहागरात का आनंद दोगुना हो जाएगा।

उन्होंने मेरे बालों में उंगलियाँ फिराते हुए कहा - प्रियंका, जानवर, मैं जानता हूँ तुम्हें घटिया चीज़ें आकर्षित करती हैं।

बोली मैं - हाँ अंकल। पर ये मेरा पति कितना बड़ा होगा, कुछ खबर नहीं।?

मामा ने कहा - इस लड़के के बारे में गुस्से से बात करना छोड़… वो मेरा हिस्सा था।

उसका लंड मेरे मुँह में था, सिर हल्का-हल्का काम कर रहा था।

उसी पल नज़र उठाई, तो दिखे दो लोग कमरे में प्रवेश करते हुए।

चाचा ने कहा - प्रियंका, ये लोग मेरे साथी हैं, रात भर इनके साथ तेरा समय बीतेगा।

बोलने ही वाली थी, तभी वे दोनों मेरे मम्मों पर झपट पड़े।

सिर पर चाचा के हाथ थे, धक्कों से मुँह में घुटन छिड़कती हुई। आवाज़ें बिना सोचे गले से निकल रही थीं - ओक, ओक, अब मत, हम।

चाचा ने कहा - ओये अनुराग, मोहन भईया… हालत ऐसी है कि तुम दोनों भी उस दुल्हन के पास जाकर शाम बिताओ!

दोनों के कपड़े उतर गए, यह देखकर मुझे हैरानी हुई। उनके पास भी घने, लंबे शरीर थे।

एकदम अचानक मुझे एहसास हो गया, ये तीनों लड़के मेरे साथ शादी की पहली रात बिताएंगे।

मोहन ने मेरे मुँह में अपना लंड घसीटना शुरू कर दिया।उसके मुँह से निकला - एह, लड़की, तू तो बहुत अच्छे से चूसती है।अरे वाह, क्या आनंद आ रहा है… और हाँ, ऐसे ही जारी रख।!

कुछ समय के बाद वह अपना लंड हटा चुका था।

मेरे होठ धीरे-धीरे अनुराग के लिंग पर आए।

एक-एक करके सभी ने मेरी माँ पर हमला कर दिया।.

मैंने कहा - ओह, थोड़ा रुकिए… आह… ये दर्द सहन नहीं हो रहा… धीरे से दबाइए।

वह मुझे ज़ोर से बिस्तर पर धकेलकर लेटा दिया। फिर नशे की हालत में मेरे शरीर पर शराब उंडेल दी। इसके बाद वह मेरी त्वचा चाटने लगा।

कुछ ही समय बाद, मेरी त्वचा पर छिड़की शराब गायब हो गई - तीनों ने एक-एक बूंद चाट ली।

गर्मी से तपने लगी थी मैं, टांगें अलग करके बोली - जल्दी करो, प्यास बुझा दो… ओह, बस जल्दी!

चाचा ने कहा - यार, तेरी गांड कितनी मुलायम है…आज तो मैं तुझे ज़ोर से पीटूंगा।!

एकदम तरोताज़ा महसूस हो रहा था, शरीर पर कहीं खुजली नहीं।.

शराब उसकी जांघों पर फैल गई। फिर वह हल्के से ऊपर-नीचे होने लगा।.

फिर वो दोनों साथी मेरी मम्मी के स्तन चूसने लगे।

मैं हांफने लगी - उफ़्फ़ क्या हो रहा है… तुरंत करो, और नहीं ठहरेगा। जल्दी से ऐसे करो, वरना बस हो गया।!

चाचा ने मेरी जांघों के बीच हाथ रखा, फिर धीमे से दबाव डालना शुरू कर दिया।

एक दोस्त ने मेरी टांग को साइड में किया, दूसरे ने आवाज़ दी - हाँ...अब चलते हो?

एकदम से अंकल ने मेरी चूत में लंड डाल दिया। कराह फिर भी बाहर आ गई - आहह हह, थोड़ा रुकिए न अंकल जी!

फिर चाचा बोले - प्रियंका हरामखोर... ऐसे आवाज़ें निकाल रही है तू, मानो कोई ताज़ा दुल्हन हो। साली, पचास बार इस लौंडे से तेरा फट चुका है।.

वह बेलगाम होकर तेजी से मूवमेंट करने लगा।

तेज़ी से हिला देने वाले थे उनके हलचल के पल।

मैं दर्द में कराहने लगी - आह, हल्का सा… रुकिए अंकल। ये ज़्यादा हो गया, बस कर दीजिए। ओए, धीमे हो जाओ ना… ऐं! ये तकलीफ़ कैसी? इतना ना करो, छोटे-छोटे झटके भी बहुत हैं। उब… मेरा शरीर लड़खड़ा रहा है, थोड़ा ठहर जाओ।!

उन्होंने जबरदस्ती लंड चूत में डाला, कहा - ले मादरचोद, साली।!

हर एक हिलने पर मैं कराहने लगी - आहह हहह आह्ह … उईईइ मा आआआ मर गई मम्मीईईई … ऐसे में सिसकते हुए बोली आह ओहह आईईई ईईई आआअह ह्ह्ह बचाओ आईईई!

तीनों हंसने लगे।

अनुराग ने कहा - अरे भई, तूने तो वहाँ पर दुल्हन का सिसकना शुरू करवा दिया।

आह… हांफते हुई बोली - उफ़, अंकल जी, मुझे छोड़ दें… तकलीफ़ हो रही है।

उसने कहा - साली, आज हम तेरी सुहागरात को अच्छे से सेलिब्रेट करेंगे, भैया के नाम पर।

मोहन ने मम्मों को चूसना शुरू किया, वहीं अंकल तेजी से धक्के देने लगे।

मैंने महसूस किया कि अनुराग ने धीरे से लंड मेरे होठों के बीच रख दिया। फिर वो आगे बढ़कर तेजी से हिलने लगा।

अब मुझे रोना शुरू हो गया।

मैं बोलने लगी - आह आह, क्या धमाकेदार साइज है, मुझे ऐसे भाव आ रहे हैं… तेजी से आगे-पीछे हो अंकल। इतनी ज़ोरदार थ्रस्ट? हाँ, ठीक वहीं, और गहरे घुसाओ। छेद दो मेरे भीतर को पूरा। उनके शरीर में जोश उफान पर था। लंड को खींच-खींचकर चूत में डालने लगे। मुंह से निकला - अरे धत तेरी, क्या बला की गर्म चूत है! यार, झटके में उठ गया मेरा मन! ढेर सारी औरतों को चोदा है, मगर तेरी तरह चिकनी लौंडिया कहीं नहीं मिली!

छन-छन की आवाज़ से कमरा भर गया, मेरी चूड़ियों की। मोहन ऊपर हो गए, मेरे सीने पर लंड रखकर धीरे-धीरे घिसने लगे। मैंने मुंह में अनुराग का लंड ले लिया, चूसते हुए।

चाचा ने ज़ोर-ज़ोर से तेजी से प्रवेश किया, इसके बाद योनि में अपना वीर्य छोड़ दिया।

मैं वीर्य की गर्माहट से बेसुध हो उठी। जब वह लंड बाहर निकालने लगा, तभी मोहन ने मेरी चूत में अपना लंड धोख दियa।

मोहन अब मुझसे जुड़ने लगा।

शराब का एक छींटा मेरे शरीर पर पड़ा, फिर आवाज़ आई - अरे ओय...इतनी होशियारी से लग रहा है। कमबख्त, ऐसे ही चलता रहे ना।

सांस लेते हुए मैंने कहा - ओह, ओह, मोहन नाम के कुत्ते… बहुत मज़ा आया, हाहा, वाकई आ गया, और कितनी तेजी से!

वो इतनी तेज़ था कि मैं फिर लय में आ गई, हाँफते हुए धीमा करने बोला - अब बस, मोहन, थोड़ा ठहर जा… मैं खत्म हो चुकी हूँ। बस कर, ये नहीं सहूँगी… ओहह, छोड़ दो मुझे!

उसने कहा – गधे की औलाद, अभी तो शुरुआत हुई है कमीने। आज तेरी जान निकाल दूँगा मादरचोद।

वह चुदाई करते समय मेरी माँ के स्तन पकड़ने लगा।

थोड़ी देर में ही मेरा शरीर गर्म हो उठा। मैंने कमर उठाकर कहा - हाँ, मैं तेरी हूँ… जोर से डालते रहो। मुझे भी ऐसा ही कोई चाहिए जो इतना तेज चढ़े, मैं भी इसी भूख में झूल रही हूँ। फिर मैंने बदल-बदलकर अंकल और अनुराग के लिंग चूसे।

थक कर मोहन ने भी मेरी चूत में गर्मी छोड़ दी, इस बीच अनुराग पास आ गया। वो ने मेरी जांघें कंधे पर डाल लिया, ऊपर बैठकर तेजी से हिलने लगा।

शरीर में दर्द उठा, जैसे कई टुकड़े हो गए हों, फिर भी चलता रहा वह।

उसने इतना तेज किया कि पहली बार में ही लय खो दी। फिर भी वो नहीं रुका, और दूसरी बार भी ऐसे उठा कि सब कुछ बिखर गया।.

हाथ जोड़कर मैंने कहा - अनुराग, मेहरबानी करके रुक जाओ। मैं बस हार चुकी हूँ…थोड़ी सी देर के लिए ठहर जाओ।!

उसके मुंह से निकला - अबे, थोड़ी देर के लिए समझौता कर ले।

तेजी से उसकी गति बढ़ने लगी, मेरी मांसपेशियों ने तबीयत खराब कर दी, कमरे में छींटों की धधकती आवाज फैल गई। अनुराग ने भी झट से मेरे अंदर अपना सारा तेज उंडेल दिया।

बोली, "अंकल जी, बहुत मज़ा आया। वाह! तीनों क्या करते हो… ऐसे ही लग गई फैन बनकर।"

उसने कहा - अब तो बस शाम ढली है, मियाँ बीवी की पहली रात अभी खत्म भी नहीं हुई है।

उठकर वो तीनों खड़े हुए, मैंने एक-एक कर उनके लिंग अपने मुँह में ले लिया। गर्म जबड़ों के साथ मैंने चूसा, धीरे-धीरे तीनों फिर से कड़े हो उठे।

उनके हाथ में तेल की बोतल थी।

उसके बाद मेरी पीठ पर तेल डाला गया, फिर हल्के-हल्के हाथों ने सब कुछ छू लिया।

अनुराग सुहागरात में बिस्तर पर लेटकर बोला - आओ यार, अब ऊपर आ जाओ।!

मैंने धीरे से उसका लंड अपनी चूत में लिया, फिर पूरा वज़न नीचे उतार दिया।

लंड को धीरे से उसकी गांड पर रखते हुए मोहन ने दबाव डाला।

धीमे-धीमे लंड भीतर को सरकने लगा।

मोहन ने मेरे चाचा से कहा - तुमने इस औरत की पूरी तरह बेड़ियाँ तोड़ दी हैं, उसने बिना किसी झिझक के लंबा घटिया ढंग से भीतर उतार लिया।

कुछ ही पल बाद, मेरे भीतर दो लंड आ चुके थे।

मोहन ने पूछा, क्या अब साली के साथ संभोग शुरू करें?

मैंने हँसते हुए कहा - अब क्यों रुक रहे हो, तेजी से आगे बढ़ो।!

उन दोनों ने तेजी से धक्के देना शुरू किया। मैं खुशी में चिल्लाने लगी - आईईई ऊईईई… मम्मीईईई… बचाओ… औऔ आईईई आ आआ… दर्द हो रहा है… आईई मर गयी ईईई आहह!

एक ने मेरी तरफ ध्यान दिया, वहीं दूसरे ने मौका पकड़ लिया। हर सेकंड खुद को गुम होता महसूस हुआ। जैसे-जैसे वक्त बढ़ा, शरीर और भावनाओं के बीच फर्क मिटने लगा। एक पल में सब कुछ ठहर गया, अगले में उठ खड़ा हुआ। किसी ने रुख नहीं मोड़ा, न ही रुकने का सवाल आया।

मोहन ने कहा - अरे भई, कुतिया, देख तेरी पिछवाड़ी कितनी अच्छी है… इसके ऊपर मारने में उतना ही मजा आ रहा है जितना तेरे अंदर घुसने में आता।

भैया ने कहा - सुहागरात इतनी खास होगी, ये बात शायद तूने मन में कभी जगह नहीं दी।

मुझे मस्ती सूझने लगी - वाओ, अच्छा धमाल है… कितनी ज़ोरदार थप्पड़ मारते हो… हंसी छूट गई हाहाहा, ऐसे ही बढ़िया चलता रहे!

वह मेरे अंदर गहराई तक आया, बाद में धीमे से अपना पूरा हटा लिया।

मैंने मुँह से धीमे से कहा - मोहन प्रिय, आज रात दो बार जमकर मस्ती हुई।

तभी वो लोग मेरे पति के कपड़े उतारने लगे। सोते हुए उसकी छोटी तख्ती ढीली पड़ी थी।.

थोड़ी देर में अनुराग ने अपना लंड मेरी गांड में डाल लिया। वह तेजी से हिलने लगा, धक्के देते हुए।.

मैं रो पड़ी - अरे सूरज, तेरी दुल्हन के साथ वो तीनों कितना जबरदस्त सामना कर रहे हैं! हाँ… हाँ… मुझे भी ऐसा लग रहा है, बस गुजर नहीं रही ये खुशी।

अनुराग ने चीज़ों को इतना खराब कर दियa कि हालत बिगड़ गई। तब्दीली के बाद वहीं ढह गया। ओर दादा जी ने आराम से सोफे के पास डेरा डाल लिया। मैंने भी अपनी जगह बना ली, जहाँ मौका मिला था शांति से बैठने का।

मोहन ने धीरे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया।

मैं धीरे से कराहने लगी - उफ़, आह, सूरज… तुम्हारा ही सहारा है… ये मुझसे छेड़छाड़ कर रहे हैं। पलटकर देखो, मेरे अंदर घुस गए हैं।

मोहन ने ज़ोर डाला, धीरे-धीरे सब कुछ अपनी जगह आने लगा।

बोली, "थोड़ा सावधानी से… हां ऐसे ही… अच्छा लग रहा है…" उसकी सांसें तेज हो गईं। अनुराग ने मुँह पर हाथ रख दिया। आवाज़ अब धीमी, टूटी हुई। फिर वो खुद को रोक न सकी। एक लंबी सी चीख निकल पड़ी। उसके बाद सब शांति।

कुछ देर के बाद मेरी चुदाई में दो लंड फिट हो गए थे।

एक पल बाद वो दोनों मेरी चूत को पूरा खोल चुके थे। मेरे होठों से लंड निकालकर मैंने कहा - अंकल, तुमने इसे एकदम ढीला कर दिया, अब सूरज को क्या जवाब दूँगी?

उसके मुंह से निकला - अरे लानत है तेरी, रांड… ऐसे पैदा हुई है ना तू कि सिर्फ इसी गतरी के लिए, भाई के बेटी!

इस बीच अनुराग भी पीछे हटकर मेरी तरफ आ गया, फिर वह धमाके से मेरे पीछे चढ़ गया।

वो सब घंटों तक इसमें लगे रहे।

उनमें से एक का वीर्य उसकी चूत में जाकर भर गया, दूसरे ने भी वही किया।

अनुराग का भी मन ही मन में बहुत खराब हो गया। उसके हाथ से छेड़छाड़ वाली चीजें निकल पड़ीं।

उठकर मैंने कहा - अंकल जी, सुहागरात में बहुत मज़ा आया, इतनी तेज़ चुदाई तो मैंने सिर्फ़ नीली फिल्मों में देखी थी।

उसने कहा - घबरा मत भईया… हम तेरी सूहाग रात कई बार इसी तरह जश्न में बदल देंगे।

पूरी रात उन दोनों ने मेरे साथ सेक्स किया, एक-एक करके बारी ली। Xxx दुल्हन वाली चीज़ हुई, जोरदार अंदाज़ में छत पर धड़ाधड़ आवाज़ें गूंजी।.

सुबह होते-होते मेरी चूत व गांड से जेली जैसा पदार्थ निकल चुका था।

पति को नंगा करके सुहागरात की सेज पर लिटा दिया गया।

वापसी का समय हो चुका था, सुबह में हम दोनों - मैं और पति - घर पहुँचे।

सूरज कुछ दिन ठहरे, फिर दुबई पहुंच गए।.

एक महीने तक भोपाल में ठहरना पड़ा क्योंकि वीजा नहीं बन सका।

एक महीने भर मैं हफ्ते में कई बार नया अनुभव लेकर सोया। किसी रात एक के साथ था, किसी में तीनों के साथ था।

उसके बाद दुबई की ओर पहुँच गई मैं।

सूरज को चोदने में मज़ा नहीं आता, उसका लंड सामान्य से बढ़िया नहीं है।मेरे भोपाल पहुँचते ही अंकल और उनके दो दोस्त मिलकर मुझे चोदने लगते हैं, हर बार ऐसा ही होता है।

एक-दूसरे के बाद तीनों ने मेरी ज़िन्दगी में ऐसा किया कि मैं माँ बन सकती थी। फिर भी, हर बार कुछ और हुआ।

बताइए, आपके ख्याल हैं क्या।.

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