ट्रेन टॉयलेट में आंटी को चोदा

Dec 15, 2025 - 18:02
Jan 21, 2026 - 17:40
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ट्रेन टॉयलेट में आंटी को चोदा

मैंने ट्रेन टॉयलेट सेक्स कहानी में इस घटना से पहले कभी सेक्स नहीं किया था और इस बारे में कुछ खास नहीं जानता था।  जब मैं ट्रेन पर एक आंटी के साथ बैठा था, मैंने उनकी छाती पर हाथ लगाया।

 दोस्तो, मैं समर शर्मा हूँ।
 मैं पश्चिम बंगाल से हूँ।

 मैं अपने जीवन-यापन के लिए एक छोटा सा बिजनेस करता हूँ और मुझे अपने काम से फुरसत ही नहीं मिलती कि मैं किसी और विषय पर सोच सकूँ।

 ये ट्रेन टॉयलेट सेक्स कहानी बहुत पहले की है।
 बाद में मैं कुछ दिनों के लिए मुंबई गया।

 तब तक मुझे मर्द और स्त्री के प्यार के बारे में कुछ खास पता नहीं था।

 फिर मैं मुंबई से वापसी के लिए टिकट ही नहीं पा सका।
 मैं घर आना चाहता था।

 मैं मजबूरी में जनरल कोच में गया और एक कुली की मदद से बहुत मुश्किल से एक सीट पाया।

 कुछ ही देर में ट्रेन चल पड़ी और फिर अपनी रफ्तार से चलने लगी।

 तब एक चाय वाला डिब्बे में आया, मैंने उससे एक चाय ली और अपने बैग से बिस्किट खाए।

 जब ट्रेन कल्याण पहुंची, मैं एक आंटी को दो बैग लेकर मेरी तरफ आते देखा।

 आंटी ने आसमानी रंग का ब्लाउज और साड़ी पहना था।
 उन आंटी की उम्र लगभग ४० से ४२ साल की होगी।

 मैं आंटी से पूछा कि क्या आप बैग नीचे रखेंगे?
 मैंने उत्तर दिया: हाँ, क्यों नहीं?

 उन्हें देखते हुए, मैंने उनके बैग को सीट के नीचे रखा।
 आंटी ने कुछ नहीं कहा और अकेले चलने लगे।

 दो घंटे खड़े रहने के बाद मुझे लगा कि शायद मुझे उनकी मदद करनी चाहिए।
 मैंने आंटी से कहा कि यहां बैठो।

 आंटी मेरे साथ बैठ गईं जब मैंने कुछ जगह बनाई।

 अब मैं उन आंटी से बात करने लगा।
 उन्हें अपना नाम कुसुम बताया गया।

 हमारे पैर आपस में सटे हुए थे क्योंकि जगह सीमित थी।

 तुरंत मालूम हुआ कि वे पटना जा रहे हैं।

 तभी किन्नर ट्रेन में आ गए।

 मैंने अपनी जेब से पैसे निकालने के लिए हाथ उठाया।
 मेरा हाथ अचानक आंटी की चूची को छूते हुए दबा गया।
 उनकी मुलायम चूची ने मुझे एक झटका सा दिया।

 फिर मैंने अपनी जेब से बीस रुपये का नोट निकालकर उस किन्नर को दे दिया।

 जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था, मैं अब तक सेक्स नहीं करता था और मैंने कभी अपना लिंग नहीं हिलाया था।

 आंटी की चूची से मेरा हाथ टकराते ही मुझे एक अजीब सी उत्सुकता हुई।
 मैं नहीं जानता था कि यह सनसनी क्यों हुई थी और कैसे हुई थी, लेकिन मुझे बहुत अच्छा लगा और मेरा लंड अपने आप कुछ तनने लगा।

 शायद यह एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया थी।

 फिर रात को 10 बजे आंटी सोने लगी।
 जब वे ऊंघने लगीं, उनका सर मेरे बदन पर टिकने लगा।

 उनके बदन की महक से मेरे अंदर एक अजीब सा अनुभव आया।
 यह सब करते हुए रात के दो बज गए, कुछ पता नहीं चला।

 तब मैं आंटी की ब्रा की पट्टी को देखा।
 मैं आंटी के ब्लाउज में झांकने लगा और उनके दूध को देखने लगा, तभी पता नहीं क्या हुआ।

 फिर मैं बेसुध सोई हुई आंटी की जांघ को धीरे-धीरे छूने लगा।

 जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई, मैं उनकी जांघ को सहलाने लगा और एक बार धीरे-धीरे उनकी जांघ को मसल भी दिया।

 इतने पर भी आंटी ने अपनी आंखें नहीं खोली, तो मुझे बहुत अच्छा लगा।
 मैं भी फुफकारने लगा।

 अब मैं बार-बार आंटी की जांघ दबाने लगा।
 फिर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैं भी आंटी की कमर को छूने लगा।

 ठीक उसी समय आंटी ने अपनी आंखें खोली और हल्की सी मुस्कुराई।
 मेरी गर्दन फट गई।

 उनकी कमर साड़ी से ढकी हुई थी।
 मैं एक क्षण तक संज्ञाशून्य था कि यह क्या हुआ?

 फिर मेरी हिम्मत वापस आ गई जब मैं आंटी की मुस्कान याद आया।
 मैंने फिर से कोशिश करने का विचार किया और हाथ को उनकी चूचियों के निचले किनारे तक ले गया।

 मैंने अपने हाथ को हल्के से आगे पीछे करने लगा और अपनी हथेली से आंटी की नरम त्वचा को महसूस किया।

 ठीक उसी समय आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
 डर से मेरी हालत खराब हो गई।

 क्या तुम शादीशुदा हो? आंटी ने धीमी आवाज में पूछा।
 मैं—नहीं।

 आंटी, आपने कभी शारीरिक संबंध बनाए हैं?
 मैंने कहा: नहीं!

 आंटी ने मेरा हाथ अभी भी पकड़ रखा था।
 फिर आंटी ने मेरे हाथ को कसकर पकड़ा और धीरे-धीरे ऊपर की ओर चली गईं।

 मेरे हाथ को उनके एक दूध पर रखकर ऊपर से साड़ी ढक लिया।

 अब धीरे-धीरे दबाओ, वे फुसफुसाती हुई बोलीं।
 मैंने धीरे-धीरे उनकी चूची को दबाना शुरू किया।
 उनके दूध की मुलायमियत से मेरा लंड कड़क होने लगा और मेरी पैंट में हलचल आने लगी।

 तुम बाथरूम में जाओ, मैं आती हूँ, आंटी ने कहा तुरंत।
 जब मैं बाथरूम में पहुंचा, मैं उनके आने का इंतजार करने लगा।

 दस मिनट बाद आंटी पहुंचीं।
 मैंने उनका हाथ पकड़ लिया और गले लगाया।

 तुमने अभी तक शादी नहीं की है, वे पूछीं।
 मैंने उनके दूध को मसलता हुआ कहा: नहीं।

 आंटी ने ब्रा में से अपना दूध निकालकर कहा, "लो, इसे आम की तरह चूसो और दबाओ", जब उसने ब्लाउज का बटन खोल दिया।

 मैं ऐसा करने लगा।
 आह आह करते हुए आंटी अपने हाथ से अपना दूध चुसवा रही थीं।

 जब मैं धीरे-धीरे अपने एक हाथ को उनकी चुत के पास ले गया, वे पूछा, "मेरी चुत चाटोगे क्या?"
 मैंने हां कहा।

 “लो चाटो,” आंटी ने कहा, अपनी साड़ी उठा कर पैंटी निकालकर टांगें फैलाकर कमर को आगे उठाते हुए।

 आंटी की चुत में बहुत बड़े बाल थे।
 मैं बैठ गया और आंटी की चुत में अपनी जीभ डालकर चाटने लगा।

 क्या सुंदर सुगंध आ रही थी।
 ऐसा लगता था कि इस छेद में पूरी दुनिया समाहित है।

 साथ ही, आंटी अपनी चुत चुसवाती और मेरे सर को दबाती हुई गांड हिलाती थी।

 मैंने कुछ मिनट चुत चाटने के बाद अपना लंड निकाला, तो मैं घबरा गया।

 मैंने पूछा, "क्या हुआ?"
 तुम्हारा लंड इतना बड़ा है, आंटी ने पूछा।

 मैंने पूछा: क्या हर कोई इतना बड़ा नहीं होता?
 वे पूछने लगीं कि क्या आपने कभी ब्लू फिल्म नहीं देखी है?

 मैंने उत्तर दिया: नहीं!
 आंटी ने समझा कि यह लड़का पूरी तरह से मूर्ख है।

 अब आंटी कुछ नहीं बोली और मेरे लंड को पीछे करने लगी।
 मैंने उनसे कहा, "तुम भी मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चाटो नहीं!"
 तो माँ ने कहा: नहीं..।  मैं विरोध करता हूँ..।  अब बस मुझे भर दो।

 मैं जल्दी से उनको किस करने लगा।

 अब जल्दी से चुत में लंड डाल दो, आंटी ने कहा।
 मैंने एक चुदाई पोजीशन बनाया।  उसने आंटी को वाशबेसिन पर गांड टिका कर खड़ा कर उसकी चुत पर अपना लंड घिसने लगा।

 वह भी सैट हुई और एक टांग उठाकर दरवाजे से बाहर फेंक दी।
 उनकी चुत खुल गई।

 मेरा लंड आंटी ने अपनी चुत पर रखा।

 उसने कहा, "हम्म... पेल दो!"
 मैंने धक्का दिया, लेकिन लंड उनकी चुत में नहीं गया।

 तुमने वास्तव में किसी की चुत नहीं चोदी, वे कहती थीं।  अब आप इस खेल में पूरी तरह से अनाड़ी हैं!
 मैं चुप रहता था।

 रुको, आंटी बोली।
 अब पेलो, उन्होंने कहा, अपने हाथ से चुत के मुँह में लंड डालकर।

 मैंने अपने कमर को हिलाकर धक्का दिया।
 ऊई मम्मी रे, आंटी ने कहा।  तुम्हारा वजन क्या है?

 मैं खुशी से धक्के मारने लगा।  धीरे-धीरे मेरा लंड चुत में अन्दर बाहर होने लगा।
 मैं खुश होने लगा।
 मैंने आंटी की कमर पकड़ी और धक्का मारा।

 इस तरह आंटी की चुदाई शुरू हुई।
 कसम मुझे आंटी की चुत चोदने में बहुत मजा आया।

 ५ मिनट बाद आंटी ने कहा, "अब पीछे से पेलो।"
 उन्हें वाशबेसिन मिल गया और वे घोड़ी बन गए।  इस बार मैं आराम से चला गया जब मैंने लंड डाला।

 मैंने उनकी कमर पकड़ ली और शंटिंग करने लगा।

 कुछ देर बाद आंटी ने कहा, "थोड़ा तेज चुदाई करो।"
 तो मैं लंड को तेजी से आगे पीछे करने लगा।

 आंटी ने एक उदास स्वर निकाला, आह उफ्फ़।

 मैं और जोर से चोदने लगा क्योंकि मेरा निकलने वाला था।

 मैं कुछ धक्कों के बाद आंटी की चूत में झड़ने लगा और अपने लंड से चुत में पानी निकालने लगा।

 तुम्हारा लंड बहुत मजबूत और मोटा है, आंटी ने कहा।
 ठीक करके वे बाहर निकल गए और मुझे होंठों पर चुंबन दिया।

 मैं भी ट्रेन टॉयलेट में सेक्स करने के कुछ देर बाद सीट पर आ गया।
 मुझसे मेरा मोबाइल लेकर आंटी ने अपना नंबर डायल किया।

 कुछ देर बाद आंटी ने कहा कि मुझे एक बार और लेने का मन है।

 क्या आपने पैंटी पहन ली है, मैंने धीरे से पूछा।
 नहीं, आंटी ने कहा।

 मैं वहीं नीचे बैठकर उनकी साड़ी में हाथ डालकर उनकी चूत को छूने लगा।
 मैंने देखा कि आंटी अपने होंठ काटते हुए खुद को बंद कर रहा था।

 मैं अपनी एक उंगली को उनकी चुत में डालने लगा।
 10 मिनट के बाद आंटी की चूत से पानी बहने लगा।  मेरी उंगली उनके रस से भर गई।

 मैं उंगली अपने मुँह में लेकर चाटने लगा।
 उठकर आंटी बाथरूम में फिर से चली गईं और जाते जाते मुझे इशारा किया।

 थोड़ी देर बाद मैं भी चला गया।

 अब जल्दी से चूत में लंड डाल दो, आंटी ने कहा।
 मैंने कहा, "एक शर्त पर"।

 आंटी ने पूछा: क्या?
 मैंने कहा, "तुम मेरा लंड मुँह में लेकर चूसो!"

 आंटी, मैं नहीं!
 मैं कहता हूँ कि एक बार करो तो आप!

 मेरी जिद सुनकर आंटी मान गईं और घुटनों पर बैठकर मेरा लंड चूसने लगीं।

 मैं बहुत खुश था।
 लंड थोड़ी देर चूसने के बाद फिर से खड़ा हो गया।

 आंटी भी लंड चूसने में मज़ा लेती थी।
 मैं आंटी के मुँह में जोर से लंड डालने लगा।  इसके परिणामस्वरूप आंटी के मुँह से गुगुगु की आवाज निकलती थी।

 फिर मैंने लंड को आंटी की चूत में डाल दिया।
 तुम्हारा लवड़ा मोटा है, आंटी ने कहा।

 मैं बिना सुने पूरी शक्ति से आंटी की चुदाई करने लगा।

 आंटी ने उफ्फ़ आह की आवाज़ निकाली।  10 मिनट की चुदाई के बाद आंटी की चूत से पानी निकलने वाला था।

 मेरा पानी आने वाला है, आंटी ने कहा।
 मैंने उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा और लंड निकाल लिया।

 तब आंटी ने अपने हाथ से मेरे सर को चूत में दबाकर कहा, "आह चाटो।"  जोर से चूसो।

 आंटी की चूत का रस मैं पूरी जीभ से चाटने लगा।
 मुझे पानी पीने को मिल गया जब आंटी की चूत से रस निकला।

 आंटी ने थकान भरी आवाज में कहा, "इस बार तुमने और बेहतरीन काम किया है!"

 मैंने कहा: "तुम्हारा हो गया..।"  लेकिन मेरा पानी कौन लेगा?
 मैं नहीं हूँ, आंटी ने कहा।

 नीचे बैठकर वे जीभ से लंड को चाटने लगीं।
 मैं उनके मुँह को भी चोदने लगा।

 मेरे पोते को आंटी गू गु करते हुए सहलाती थीं।
 कुछ मिनट बाद मैंने आंटी के मुँह में लंड का पानी डाल दिया।

 वे मेरा जल पी गए।

 तब हम दोनों अपनी सीट पर आकर सो गए।

 अब मैं आपको लिखूँगा कि अगली मुलाकात किस भाभी या आंटी से होगी।
 मैं रसभरी चुदाई का आनंद लेने लगा और कई लड़कियां मेरे लौड़े से चुदवाने लगी।

 मैं आपको मेरी ट्रेन टॉयलेट सेक्स कहानी कैसी लगी?

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