पूजा भाभी को मेंढक बनाकर कुर्सी पर किया चुदाई

Dec 11, 2025 - 17:51
Jan 21, 2026 - 17:38
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पूजा भाभी को मेंढक बनाकर कुर्सी पर किया चुदाई

मैं रोहन हूँ, 24 साल का, और घर में अकेला हूँ।  जब घर में सिर्फ मैं और पूजा भाभी रहते हैं, भैया की दुकान, मोहल्ले की सबसे बड़ी किराने की दुकान, पसीने से तरबतर होकर पैसे गिनते और सामान बेचते हैं।  भाभी, 29 साल की गोरी-चिट्टी औरत, जिनका बदन 36-30-38 का कातिलाना आकार है, भरे हुए बूब्स, जो साड़ी के ब्लाउज़ में दबकर भी उभरते हैं, पतली कमर, जो छूने पर गर्म होती है, और मटकती हुई गाण्ड, जो चलते हुए हवा में लहराती है, जैसे मोहल्ले के लड़कों को ललचाती है, उनकी खुशबू घर भर में फैलती

 शुरू से ही भाभी के साथ मेरा रिश्ता अच्छा था, लेकिन सेक्सुअल नहीं था, वो मुझे छोटा देवर समझती थीं, मैं भी डरता था, लेकिन पिछले कुछ समय से भैया की दुकान में बहुत काम था, भाभी अकेली घर पर रहती थीं, मैं कॉलेज से जल्दी आता था,  बातें धीरे-धीरे विकसित होने लगीं,  पहले चाय बनाकर देती थीं, फिर साथ बैठकर टीवी देखते थे; कभी-कभी मैं उनके पैर दबा देता था,  “रोहन, तू बहुत अच्छा मालिश करता है,” भाभी हँसती है।  मैंने सोचा कि यह अवसर था,  धीरे-धीरे भाभी को छूने के बहाने ढूंढने लगा, कभी-कभी किचन में पीछे से गुजरते हुए गर्म और नरम कमर पर हाथ रखता, कभी-कभी सोफे पर बैठे-बैठे जाँघ पर हाथ रखता,  भाभी ने पहले हटा दिया और तेजी से हँसने लगी।  “भाभी, आपकी साड़ी बहुत अच्छी लग रही है,” मैंने एक दिन कहा।  “तेरी भाभी बूढ़ी हो गई है,” उसने कहा, शरमाकर।  “नहीं भाभी, आप तो हीरोइन लगती हैं,” मैंने कहा।  जैसे मेरी बात सुनकर उनकी आँखें चमक उठी हों।


 फिर मैंने अपने फोन पर अश्लील वॉलपेपर लगाया,  एक दिन, मैंने भाभी से फोन माँगा, तो मैंने जानबूझकर दे दिया।  “ये सब क्या-क्या देखता है तू?” उसने वॉलपेपर देखकर पूछा। “,  मैंने उनसे कहा, “भाभी, लड़के देखते ही हैं,  तुम भी बहुत सुंदर हो,  क्या कोई देखा? “,  वो शरमा गईं, लेकिन उनकी आँखें उत्सुकता से भर गईं,  “रोहन, मोमबत्ती जला दे,” भाभी ने कहा, “रात को भैया दुकान पर थे, बिजली चली गई।”  मैं मोमबत्ती लेकर उनके कमरे में गया तो भाभी नहाकर आई थीं, साड़ी बदल रही थीं, दरवाजा थोड़ा खुला था. मैंने देखा कि भाभी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं, उनके बाल गीले थे, बूब्स का आधा हिस्सा दिख रहा था, उनकी त्वचा गीली और चमकदार थी, पूरे कमरे में पसीना और साबुन की मिली हुई महक थी  मुझे देखकर भाभी ने दरवाजा बंद कर दिया।  अगले दिन सुबह, भाभी कुछ अजीब तरीके से बोली,  “भाभी, कल गलती से हो गया, सॉरी,” मैंने साहस से कहा।  “बस तुम बड़ा हो गया है,” उसने मुस्कुराते हुए कहा।  “अब ऐसी गलतियाँ नहीं करनी चाहिए,” उन्होंने कहा, लेकिन उनकी आवाज़ में नरमी थी, जैसे उन्होंने अपने मन से माफी मांगी होती।

 यह भी पढ़ें: छोटी बहना को प्यार दिया | घरेलू सेक्स कहानी हिंदी में धीरे-धीरे मैं भाभी को छूने के लिए अधिक मौके बनाने लगा, जैसे शाम को चाय बनाते समय पीछे से चिपककर मदद करने का बहाना करते हुए, जब मेरा लंड उनकी मुलायम और गर्म गाण्ड से दब जाता था।  भाभी सिहर जाती हैं, लेकिन नहीं हटतीं,  एक रात भैया देर से दुकान पर आने वाले थे,  “भाभी, आज मालिश कर दूँ?” मैंने भाभी से पूछा। “,  उसने पहले मना किया, फिर कहा, “चल ठीक है, पैर दबा दे।” मैं धीरे-धीरे पैर दबाते हुए जाँघ तक हाथ ले गया,  साड़ी ऊपर तक सरक गई, हल्की गीली पैंटी दिखने लगी,  "भाभी, भैया तो आपको टाइम ही नहीं देते, आप भी तो औरत हैं, आपको भी तो चाहिए होता है", मैंने हिम्मत करके कहा, "रोहन, ये गलत है." उनकी आवाज़ में गुस्सा नहीं था, लेकिन मैंने कहा, "मैं हिम्मत करके जाँघ के अंदर हाथ फेरा।"  वह चुप हो गई और अपनी साँसें तेज कर दीं,  भाभी इस बार नहीं रोका, जब मैंने फिर हाथ बढ़ाया।  मैंने अपनी गर्म और चिपचिपी चूत को पैंटी के ऊपर से सहलाने लगा,  भाभी की साँसें तेज हो गईं, "रोहन... नहीं..।"  कोई देखेगा..। “,  “कोई नहीं है भाभी, बस एक बार,” मैंने कहा।  मैंने धीरे-धीरे पैंटी में उंगली डाल दी,  भाभी की गीली चूत से हल्की महक आ रही थी,  "आह्ह..." उन्होंने सिहर कर कहा।  रोहन..।  बस..।  निकाल....”, लेकिन टाँगें फैलाकर,  मैंने अपनी दो उंगलियों को अंदर-बाहर करने लगा, जिससे चिपचिपी आवाज़ निकली. भाभी की आँखें बंद हो गईं और उसने कहा, “ह्ह्ह... आह्ह..।  कितने दिन बीत गए..। मेरी उंगलियों को उनकी चूत की दीवारें जकड़ रही थीं और उनमें से रस बह रहा था।

 उसी रात मैंने अपनी भाभी को पहली बार चूमा. वह पहले मुझे रोकती थी, लेकिन फिर खुद मेरे होंठ चूसने लगी।  वह मेरी जीभ से खेल रही थी, मीठी लार का स्वाद लेकिन चुदाई नहीं कर रही थी,  “भाभी, पूरा मजा लेंगे, लेकिन सही टाइम पर,” मैंने कहा।  इसके बाद मैंने सिर्फ छेड़खानी बढ़ाई, चूत में उंगली डाली, बूब्स दबाया, लेकिन लंड नहीं डाला।  अब भाभी खुद को परेशान करने लगी,  एक दिन भैया दुकान पर थे, जब बारिश हो रही थी और बाहर बूँदों का शोर था।  "रोहन, अब और नहीं सहन होता," भाभी ने कहा और मुझे किचन में बुलाया।  आज करो,  “भाभी, आज कुर्सी पर मेंढक बनकर करवाओगी तो ही करूँगा,” मैंने मुस्कुराकर कहा।  भाभी की आँखें वासना से चमक रही थीं, हालांकि वे शरमा गईं।

 यह भी पढ़ें: साली ने घरवाली का सुख दिया (Sali ki chudai) मैंने भाभी की साड़ी-ब्लाउज सब उतार दी, सिर्फ पैंटी रही, जो रस से गीली हो चुकी थी. फिर मैंने कुर्सी लाकर हॉल में रखी, जो भैया की पसंदीदा थी, लकड़ी की और हल्की स्क्रीच से बना हुआ था।  “अब कुर्सी पर चढ़ो, घुटने मोड़ो, गाण्ड ऊपर करो, बिल्कुल मेंढक की तरह,” भाभी को बताया।  जैसे कोई जानवर इंतज़ार कर रहा हो, भाभी ने वही किया, कुर्सी पर हाथ टिकाए, घुटने मोड़े, भारी गाण्ड पूरी तरह ऊपर,  उनकी जाँघें काँप रही थीं, उनकी पीठ पसीने से चमक रही थी,  पहले मैंने उनके पीछे खड़े होकर उनके मुलायम और गर्म गालों को मसला, उंगलियाँ धँस रही थीं,  भाभी सिहर उठी, "रोहन... जल्दी कर...", मैंने पैंटी नीचे सरकाई, भाभी की गुलाबी चूत से पानी निकल रहा था, जो चिपचिपा और महक रहा था, और कमरे में हल्की मछली की गंध फैल रही थी।  मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना कड़क और मोटा लंड निकाला।  नाक फूली, सुपारा लाल,  मैंने गर्म और चिपचिपा लंड पर थूक लगाया, फिर भाभी की चूत पर ऊपर-नीचे रगड़ा, क्लिट सूजी हुई थी,  भाभी की साँसें तेज हो गईं, "आह्ह... रोहन... डाल दिया..।" मैंने सुपारा को चूत के मुँह पर रखा और धीरे से दबाया, इससे वह अंदर सरका।  भाभी ने इसे पकड़ा, "ओह्ह्ह... धीरे..।"  तुम बहुत मोटा हो..। मैंने चूत की गर्म दीवारों को घेरकर आधा लंड अंदर डाला, रस से भरा हुआ, फिर बाहर निकाला और फिर आधा अंदर डाला, भाभी की गांड उछलती हुई, "आह्ह्ह..।  पूरा डाल..।  मतभेद मैंने कमर पकड़ी और एक जोरदार झटके से पूरा लंड चूत में डाल दिया।  भाभी ने क्रोध से कहा, “आअह्ह्ह्ह..।  रोहन..।  मर गया..।  आह्ह्ह्ह  बहुत देर बाद..।  ओह..। चूत की दीवारें काँप रही थीं, पूरा लंड अंदर-बाहर होने लगा, पट-पट-पट-पट की तेज आवाजें, ग्च्छ... ग्च्छ... की गीली ध्वनियाँ, कुर्सी हिल रही थी और स्क्रीच कर रही थी।  मैंने भाभी की कमर कसकर ठोकना शुरू किया,  हर झटके में भाभी की गाण्ड ऊपर-नीचे हो रही थी, उनकी जाँघों से पसीना टपक रहा था. मैंने उनके बाल पकड़े और पीछे खींचे, तो गाण्ड और ऊपर उठ गई।  अब गहराई में जा रहा था,  भाभी ने रोते हुए कहा, “आह... ह्ह्ह..।  अधिक तेज रोहन..।  आज फाड़ दो..।  ओह..।  कुर्सी हिलती है..।  आह्ह्ह मैंने भाभी का बूब्स निकालकर एक हाथ से मसलना शुरू किया,  नमकीन स्वाद वाले कड़क निप्पलों को जीभ से चाटते हुए मैंने भाभी को कुर्सी पर रखते हुए गाण्ड में उंगली डालकर खेलने लगा, थूक लगाकर अंदर-बाहर।  “ओह्ह्ह..।  नहीं है..।  आह..।  खराब है..। लेकिन उन्होंने खुद उंगली निगल ली,  मैंने लंड को चूत से निकाला, जो रस से ढक गया था, फिर धीरे-धीरे गाण्ड पर रखा,  “नहीं रोहन..।  बहुत कष्ट होगा..। “बस कुछ, मज़ा आएगा भाभी,” मैंने कहा।  लंड का सुपारा गाण्ड में घुस गया, थोड़ी देर मसलने और थूकने के बाद,  भाभी ने रोते हुए कहा, “आअह्ह्ह्ह्ह..।  मर गया..।  ओहह्हीईई..। धीरे-धीरे पूरा लंड गाण्ड में चला गया, गाण्ड की टाइट दीवारें गर्म और चिपचिपी थीं. मैंने फिर से ठोकना शुरू किया, कुर्सी की तेज हिलने और पट-पट की आवाजों के साथ. भाभी भी रो रही थी और खुशी से कह रही थी, “आह... ह्ह्ह... रोहन..।  आज तुम दोनों टूट गए..।  ओह..। “,  इसी आसन में पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद मैंने भाभी की गाण्ड में सारा माल छोड़ दिया।  गर्म पिचकारी से भाभी कुर्सी पर गिर पड़ी,  साँसें तेज चल रही थीं, वीर्य और रस टपक रहे थे,  मैं भाभी को गोद में लेकर बेडरूम चला गया।

 इसे भी पढ़ें Bua Ne Papa Se Mujhe Bhi Chodne Ko Bola शाम तक हमने चार बार और चुदाई की, हर बार भाभी ने कुर्सी पर मेंढक बनकर ही चुदवाया, अब जब भी भैया बाहर जाते हैं, भाभी खुद कुर्सी ले आती हैं और बोलती हैं, “चल रोहन, आज फिर मेंढक बन जाऊं? ”।

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