एक पति अपने दोस्तों के साथ मिलकर ऐसा कुछ करने लगा जहाँ हर बात गले तक आ गई।

Jan 9, 2026 - 11:49
Feb 5, 2026 - 16:17
 0  2
एक पति अपने दोस्तों के साथ मिलकर ऐसा कुछ करने लगा जहाँ हर बात गले तक आ गई।

अरे भइया, मीता राठी फिर से पहुँच गई हूँ आपके पास। इस बार भी लेकर चली आई हूँ वो ही कहानी, जो छूती है कुछ ऐसी बातें जो शब्दों से परे होती हैं।.

Romantic Romp GIFs - Find & Share on GIPHY

एक हिस्सा मैंने पहले बताया था।

पति और उनके दोस्तों के साथ चुदाई की रंगरेलियां- 2

उसमें नोट था कि मेरे साथ-साथ सौम्या भाभी के साथ जमकर सेक्स हुआ था। पति के अलावा उनके दो यार और दीपू ने भी हम दोनों को चोदा था। सौम्या भाभी सुबह होते ही घर चली गईं, चुदाई के बाद। फिर जब लौटीं, तो ताज़े पराठे लाई थीं, गरम-गरम।.

हम छहों ने उसके हाथ से बने नाश्ते का स्वाद अपना लिया था।.

हर कोई बिल्कुल नंगा था। सौम्या भाभी ने भी कपड़े उतार दिए थे, वो आनंद ले रही थीं।.

अब आगे :

चाय के साथ दही में डुबोकर पराठे खत्म हो गए। भाभी ने जो आलू के पराठे बनाकर रखे थे, सबके हिस्से में आ गए।.

इधर-उधर की बातें करते हुए सभी एक साथ दिन भर के प्रोग्राम पर चर्चा कर रहे थे।.

शाम तक का वक्त हमारे पास था। अवि और करन को शाम में चलना था, इसलिए। भाभी के पति भी घर आ रहे थे उसी वक्त। सब मिलकर बस इतना सोच रहे थे कि दिन का हर पल जिया जाए।.

तय बात थी कि आज नहाने-धोने के बाद सिर्फ और सिर्फ चुदाई होनी है।.

अब किसी को भी पहनना नहीं था उनमें से कोई कपड़ा। गार्डन में घूमना अब बिलकुल सही लग रहा था, क्योंकि पड़ोसी दोनों हमारे साथ खड़े थे।.

हमारा बगीचा सिर्फ उन दो पड़ोसियों को दिखता है। अब सुबह के तेज नहीं, बल्कि धीमे सूरज में शारीरिक सुख का एहसास बदल जाएगा।.

तय हुआ, सभी जल्दी-जल्दी नहाकर बगीचे में पहुँच जाएँगे।.

फिर भाभी ने कहा - ओय, दिनभर सिर्फ सेक्स करने से पेट नहीं भरता। खाना भी तो खाना पड़ता है। अब तुम लोग नहा लो, मैं इधर घर जाऊँगी। वहाँ से खाना बनाकर लाती हूँ।.

बिना सोचे-समझे मैंने इनकार कर दिया - खाना तो हमारे घर पर ही बनेगा।.

फिर यह तय हो गया कि मर्द सबसे पहले नहाएंगे। उधर, खाना बनाने की ज़िम्मेदारी मेरी और भाभी की होगी।.

अब मैं तैयार हो चुकी थी, साथ में भाभी के किचन की ओर बढ़ना।.

अचानक राज वहाँ पहुँच गया।.

अब करन ने बेडरूम वाले वाशरूम का रुख किया। दूसरी ओर, अवि और दीपू ने एक साथ दूसरे वाशरूम को चुन लिया।.

अब कोई झिझक नहीं रही थी, स्नान और शौच दोनों एक साथ होते थे।.

राज को सब्जियाँ काटने में हुनर था, इसलिए वही काम उसने संभाल लिया।.

फिर हम दोनों, मैं और सौम्या भाभी, बचे हुए काम पर लग गए।.

किचन में काम का सिलसिला शुरू हुआ, तब तक हम तीनों बिना कपड़ों के वहाँ खड़े थे।.

अजीब सा लगने लगा था कुछ, पर मस्ती भी हो रही थी।.

चाकू से सब्जियों को काटते हुए राज मेरे होठों पर चुपके से छुआ देता। मम्मी की आवाज़ सुनकर वह जल्दी से भाभी के गाल पर हाथ फेर देता।.

पहले तो उसने लौकी को अच्छी तरह धोया। फिर वह सीधे मेरी चूत में डालने लगा, बिना कुछ कहे।.

सांस के साथ आवाज़ छूट गई।.

थोड़ी सी लंबी थी लौकी। दीपू के लिए तो वो बहुत ज्यादा बड़ी थी, पर अंदर नहीं गई। ‘छोड़ो, कभी और ट्राई करेंगे’ कहकर मन लगा लिया।

राज ने कहा, ये बड़ी लौकी अलग रखो। उसने एक छोटी वाली उठाई। मेरी चूत में डाली, आगे-पीछे हुई थोड़ी। फिर भाभी के पास गया, वहीं से चलते-चलते उनके अंदर भी। बिना धोए, बिना कुछ किए, काटने लगा। अब तो लौकी में चूत का रस घुल चुका था। स्वाद अलग होने वाला था, सभी के लिए।.

चपाती बनाने का सिलसिला शुरू हुआ, जब सब्जी और चावल पक चुके थे।.

जब सब कुछ खत्म हो गया, तो उसने मुझे और राज को टॉयलेट जाने की बात कही।.

फिर भी टॉयलेट बंद थे, तब हम वहीं ठिया गए।.

जब वक्त मिला, तय हुआ कि राज के साथ क्रिकेट खेल लें।!

मैंने आगे बढ़कर राज की ओर देखा। फिर धीमे से नीचे झुक गई। मुँह ने उसके लंड को छू लिया। हल्के होंठों ने चाटना शुरू कर दियa।.

चपाती को रोटी साजने के दौरान भाभी ने मेरा हौसला बढ़ा दिया।.

उस समय तक करन पूल में नहाकर लौट चुका था।.

उसकी नजर पड़ते ही लंड ऊपर उठा, फिर वह हंसते हुए भाभी की ओर मुड़ गया। चपाती बेलते हुए भाभी के पीछे वह आकर खड़ा हो गया। धीरे से जांघों के बीच लंड घुसाया, दोनों हाथों ने मम्मे को जकड़ लिया।.

कमरे में भाभी का सिर धीरे-धीरे पीछे झुकने लगा। उनके होंठ करन के करीब आए, बिना किसी रुकावट के।.

थोड़ा सा दूर हटते हुए करण ने झुकाव बनाया। पल भर में उसने पीछे से भाभी की गांड चाटनी शुरू कर दी।.

उनकी नजर सिर्फ एक पल के लिए टिकी।

आगे बढ़कर उसने पीछे से भाभी की चूत में उंगलियां घुमाई। धीरे-धीरे हथेली गांड तक पहुंची।.

मैं राज का लंड चूसना छोड़कर उन दोनों की ओर देख रही थी। अब भाभी ने चपाती बेलना छोड़ दियa, फिर वे करन के सामने झुक पड़ीं।.

करन पीछे से चढ़ गया। लंड भाभी की चूत में समा गया, धीमे-धीमे हिलने लगा। आवाज़ें उनके मुँह से बाहर आने लगीं, ठहरी हुई थीं।.

उसकी आवाज़ में एक सुन्नपन था, जब वो बोली कि पति ने कभी इस तरह उसे छुआ ही नहीं।.

उन्हें चुदवाने में खुशी मिल रही थी। मैंने पकड़ लिया कि दोनों इसी अंदाज में झड़ने तक आगे-पीछे होते रहेंगे।.

पेट में हलचल होने लगी थी, इसलिए मैंने राज को बताया और बाथरूम की ओर चल पड़ी।.

फिर वही हुआ। राज भी पीछे-पीछे आने लगा।.

जब उस तेज़ आवाज़ ने मुझे चौंका दिया, तो मैं झटपट शौचालय की ओर भागी। वहाँ बैठते ही मेरे मुँह से एक घुटी हुई आवाज़ निकल पड़ी।.

पर राज ने कहा – सुन, मुझे भी पेशाब रोक नहीं पा रहा। थोड़ा खिसक जा, मेरा झटपट निपट जाए। वो कमोड से क्योंकि उठ नहीं सकती थी।.

जब राज मेरे सामने आकर खड़ा हुआ, मैंने पैर फैलाए और बोला - बीच में पेशाब कर। वह पेशाब करने लगा, तो धार इधर-उधर भटकने लगी।.

हाथ से लंड को पकड़ा, तब मूत्र की धार सीधी हुई। डगमगाने से पहले वो इधर-उधर फेंक रहा था।.

गर्म पानी के छींटों ने मुझे जैसे तरोताजा कर दिया।.

हाथ ने लंड को घुमाया, तभी गर्म-गर्म पेशाब टांगों के बीच से हटकर चूत पर आई। फिर पेट पर छिपक गई। अंत में चूचियों पर भी बखर गई।.

हल्की सांस लेने पर। कैसे कोई बदल सकता है इस अहसास को… धीमी गति से फैलता खुशनुमा सिहरन

मैंने जब सारा मूत्र निकाल लिया, तब उसके लिंग को मुँह में ले लिया। इसके बाद मैं गहरे तक चूसती रही, जब तक मेरी टट्टी पूरी नहीं हो गई।.

थोड़ा सा उसका पेशाब मेरे मुँह में आ गया।.

बाथरूम से बाहर आते ही राज ने मेरी गांड साफ कर दी। उसकी आवाज में कोमलता थी। अचानक उसने पूछ लिया - आज एनीमा क्यों छोड़ दिया?

हां भई, मेरे दिमाग से निकल चुका था।

अब तो ले आओ, फिर क्या बुराई है? सारा गड़बड़ झट से निकल जाएगा। मैंने उसकी गद्दार गांड में एनिमा की नली धकेली, पानी छोड़ दिया। जब सारा क्रम पूरा हुआ, तो छोटी-छोटी टट्टियाँ भी ओझल हो गईं।.

अब तक मैंने अपनी गांड साफ कर ली थी। इसे देखकर राज के चेहरे पर खुशी आ गई।.

उसने धीमे से, पलक झपकते हुए, घाव को जीभ से छुआ।.

वह अपनी जीभ से गुदा में घुसकर चाटने लगा।.

उड़ान भरती हुई सी लग रही थी।.

गीलापन महसूस कर रही थी चूत, दोबारा।

मैंने राज की तरफ देखकर कहा - अब थोड़ा आराम कर ले। मेरे शरीर से इतना पानी बह रहा है कि लगता है, प्यास से कमजोर हो जाऊंगी।?

थम गया राज।.

एक सवाल उसने पूछा - तुम्हें पता है मेरी चिकनी चुत को गांड चाटने से क्या लगाव है?

क्या मुझे पता होगा? मैंने कहा।?

एक आदमी ने समझाया कि जो किसी की पीठ पर चढ़ता है, वह खुद भी किसी के नीचे दबा रहता है। ऐसा इंसान जिसके ऊपर दूसरा बैठता है, वह फिर उसका गुलाम बन जाता है।.

“ओह … मैंने ऐसा कभी सोचा ही नहीं था.”

मैंने राज से कहा – अब मैं तुम्हारी गांड चाटूंगी, बस इतना जानो कि तुम मेरे हर फैसले के मालिक हो। आज वो सब कर लो जो तुम्हारी मर्जी हो, प्रभु।!

खुशी-खुशी राज ने हां कह दी, साथ में एनीमा लेने पर भी।.

उसके पीछे हल्के हाथ से छुआ मैंने।.

बैठाया गया कमोड पर, समय आ चुका था टट्टी का।.

जब मैंने उसकी टट्टी की, तो वह बदले में मेरी चूत चाटता रहा।.

बच्चे को नहलाने के बाद मैंने उसके शरीर के निचले हिस्से को साफ किया, फिर वहाँ छेड़छाड़ शुरू कर दी।.

उंगली एक-एक कर अंदर जाती, फिर चाटना आता शुरू। चूमना इस सबके बीच कहीं घुस जाता।.

वाशरूम में सौम्या भाभी के अंदर करन का पूरा वीर्य होने के बाद वह तुरंत वहाँ पहुँच गईं।.

मैं राज की गांड में व्यस्त थी। इधर, वो राज के सामने आकर खड़ी हो गईं। अब उन्होंने उससे अपनी चूत साफ करवानी शुरू कर दी। राज ने अपनी जीभ से पूरा माल साफ किया। भाभी की चूत चमकने लगी, मानो कांच हो।.

भाभी ने देखा कि राज की पीठ सहला रहा है। फिर मुस्कुराते हुए बोलीं - आज ऐसा कुछ करना चाहिए जो कम समय में अच्छा लगे।?

अच्छा खयाल था, हालाँकि राज को बिलकुल पसंद नहीं आया।.

उसने कहा - आज नहीं… पर कभी ज़रूर। आज तो सिर्फ तुम दोनों को खत्म करेंगे। कल मीता की हालत खराब थी, पर अब भाभी की बारी है। मीता को शांत छोड़ दो, अब सौम्या भाभी की बारी है।.

उसने झिझकते हुए सहमति में सिर हिला दिया।.

उन्होंने कहा, राज, तुमने 'नहीं' नहीं कहा, सिर्फ़ इतना कहा - ‘आज नहीं।’ यानी कभी न कभी तुम गांड मरवाना चाहोगे। ये बात मैं ध्यान में रखूंगी। अवि और करन को आज ही वापस जाना है, पर दीपू तो अभी यहीं मौजूद है।.

तभी एक साथ हँसी का प्याला छलक उठा।.

सौम्या भाभी की गांड मारने के बजाय अब उसे चीरना है।.

उस दिन सुबह-शाम का हिसाब नहीं था, बस इतना पता था कि जैसे कुछ तीखा चीज़ अंदर घुस गया।

शायद आज मेरी गांड कुछ नया सोचेगी। उसने बताया था, हलकी चिढ़ के साथ।.

तभी अचानक याद आया - राज को कुछ दिन पहले पाइल्स हो गए थे।.

फिर उसने कुछ मलहम लगाई। तब आराम मिला, सचमुच अच्छा लगा।.

उसे मिला सिर्फ़ तब, जब वो मशरूम के पास पहुंचा।.

एकदम तुरंत मैंने वो ट्यूब हाथ में लिया। फिर बहनजी के पिछवाड़े मलहम लगा दिया।.

उंगली से धीरे-धीरे मलहम लग रहा था, भाभी के पास इतना वक्त नहीं था कि किसी चीज़ का एहसास हो। राज का लंड उनके मुँह में था, और आवाज़ें छुपी हुई थीं।.

मलहम लगाने पर धीरे-धीरे दर्द ढीला पड़ने लगा।.

लेकिन उन्होंने कहा - अभी भी मुझे पिछवाड़े पर चोट लगने का डर सता रहा है। अब दीपू का इतना मोटा हथियार मैं किस तरह समेट पाऊंगी?

सच तो यह है, भाभी ने जो कहा वह सटीक था।.

एक तरीका उसके लिए ठीक होने का भी था।.

छोटे लंड से आगे बढ़कर मोटे तक पहुंचना संभव है।.

फिर भी छोटा लंड कहाँ से लाएँ? यहां हर किसी का लंबा ही लंबा है… वैसे दीपू का तो बिलकुल जानवर-सा।.

छोटे से लेकर बड़े तक हर तरह के डिल्डो मुझे मिले हैं, सौम्या भाभी ने कहा।.

उठकर चल पड़ीं, घर की ओर।

बिना कुछ पहने वो चल दीं, फिर घर पहुँचकर तीन अलग-अलग मोटाई के डिल्डो साथ ले आईं।.

एक छोटा था, दूसरा बड़ा हुआ करता था। तीसरा कहीं बीच में पड़ता था।.

लंड की लंबाई में सबसे ऊपर वही था, बाकी सभी उसके मुकाबले छोटे पड़ते थे। जब भाभी घर लौटीं, मैंने पूछ डाला - क्या नंगे होकर बाहर घूम आईं, शर्म नहीं आई? किसी ने तो देखा नहीं?

फिर भाभी ने कहा - अब तो बिना कपड़ों के रहना ही अच्छा लगता है। कोई देख ले, तो उसकी मर्जी, मैं झेंपने वाली नहीं हूँ। घर में तो अब मैं ऐसे ही घूमूंगी, दोनों घरों में इधर-उधर आऊंगी। मेरा मोटा पति तो कभी छुआ तक नहीं, अब राज और दीपू ही संभालेंगे। मन में आ गया, यह अब थमने वाला नहीं है।.

दीपू तथा राज हमेशा मुझे व सौम्या भाभी को चोदते रहेंगे, अवि और करन ऐसा नहीं कर पाएंगे।.

उसके बाद राज तथा मैं सौम्या भाभी के साथ नहाने गये।.

पानी के छींटे उड़ते हैं, फिर कोई हंस पड़ता है।.

राज की भाभी ने उसे साफ़ करते हुए साबुन लगाया। उसके लंड पर खास तौर से ध्यान देकर अच्छे से मला। फिर तौलिए से पूरा शरीर सुखा दिया।.

मैंने उसकी चूत पर ख़ास ध्यान दिया। वो हम दोनों ने मिलकर भाभी को ठीक से नहलाया।.

बाद के घटना में, हम तीनों बगीचे में टिक गए। वहाँ पर अन्य तीन लोग पहुँच चुके थे।.

शराब के घूँट उतारते हुए वे सभी तीन एक साथ मौजूद थे।.

बहन ने कोई झिझक नहीं की, सीधे दीपू के पास जा बैठी। फिर उसके हाथ से गिलास लेकर पीना शुरू कर दिया।.

मेरी तरफ़ देखकर अवि ने हाथ बढ़ाया।.

उधर राज की ओर नज़र पड़ी, वह हल्के से मुस्कुराया और आगे बढ़ने का इशारा किया।.

बिना सोचे मैं अवि के पास जा पहुँची।.

उसकी जांघों के बीच में वो छड़ सीधी खड़ी थी, ऊपर-नीचे हो रही थी। मैं उसकी गोद में से उतर आई। बोली, पहले इस लंबी चीज़ को संभालती हूँ… तभी कुछ और सोचूंगी।.

हँसते-हँसते सभी ने मेरा साथ दियa। उठकर अवि वहाँ खड़ा हो गया।.

जमीन के बराबर सपाट फैला हुआ था उसका लंबा लंड, शरीर से आगे झूलता हुआ।.

एक खूबसूरत दृश्य था। उधर, भाभी की निगाह लंबे समय तक उसके लंड पर टिक गई।.

तीनों आदमी वहाँ खड़े कुछ देख रहे थे।.

उसके लंड पर मेरी गांड की नरमता का स्पर्श पड़ा, तो बस हो गया कमाल।.

अवि का लंड सुबह के नौ बजे की रोशनी में चमक उठा।.

भाभी ने दीपू की गोद छोड़ी, सीधे अवि के पास जमीन पर बैठ गई। फिर वह झुकी, और धीरे से उसके लिंग को होंठों में ले लिया।.

भाभी के पास जाकर मैं वहीं बैठ गई। फिर एक-एक करके हम दोनों ने अवि के लंड को मुँह में लेना शुरू कर दिया।.

सौम्या भाभी के मुँह में लंड जब था, उस वक्त मैं अवि के टखनों पर होंठ फेर रही थी। बचे हुए तीन आदमी इस दृश्य को घूरते रह गए।.

कुछ लोग सिर्फ इसलिए पीछे से जुड़ना चाहते थे कि दोनों लड़कियों की कमर ऊपर उठी हुई थी। दीपू को भाभी के पिछवाड़े में अपना लंड धंसाने का बहुत शौक था। .

फिर भाभी ने मना कर दिया, पर दीपू ने पीछे से उसकी चूत में अपना लंबा लंड धकेल दिया।

हालत खराब थी… तभी राज सामने आया।.

थूक राज के होठों से बाहर आया। भाभी की चूत पर फैल गया वो। दीपू के लंड पर भी छाया रहा तब।.

धीरे-धीरे दीपू का लंड सौम्या भाभी की चूत में अंदर घुसने लगा।.

थूक की मात्रा ने राज के हर पल में काम करने लगी।.

थोड़ी देर में भाभी की चूत से पानी आने लगा, वह तर हो गई। इस बीच दीपू ने एक सहज लय पकड़ ली, धीमे-धीमे उसे चोदने लगा।.

इतना सुंदर लय क्या हो सकता है।.

मुझे लगा, कोई चिल्ला रहा है। फिर पता चला, भाभी हैं। उनके होठों से धीमे स्वर में आहट आ रही थी। कभी-कभी 'उइ माँ' कहतीं। ऐसा लग रहा था, बस खत्म हो गई।.

अचानक से भाभी की बोलती बंद हो गई, जब उनके मुँह में अवि का लंड चला गया।.

मुँह में लंड घुसते ही भाभी के होठों से एक अजीब सी गूँ-गूँ निकल पड़ी।.

जैसे ही राज और दीपू सौम्या को चुदाई के बहाने व्यस्त थे, करन मेरे पीछे आ खड़ा हुआ।.

शुरूआत में वो मेरी कमर पकड़कर मेरी चूत और फिर गांड को जीभ से साफ़ करने लगा।.

मुझे उसके चाटते हुए देखकर प्यास लगने लगी।.

उसने मेरी चूत का स्वाद अपनी जुबान पर महसूस किया, फिर वही नमी मेरे गुदे में धीरे से घुला दी। ऐसा लग रहा था, बस एक ही चीज़ उसके दिमाग में थी - मेरे पिछवाड़े पर कब्जा करना। .

मैं भी तभी से यही चाह रही थी, अपने हिस्से का काम करके उसके पीछे खड़ी हो गई।.

लगता था कि अवि का लंड भाभी के साथ बँटवारा होना मुझे सही लग रहा था।.

मैंने भाभी के होंठों पर मुँह रख दिया, जब अवि का लंड अंदर था।.

अचानक देखा, तो भाभी के मुँह पर किसी का हाथ था। बीच में अवि का लंड झांक रहा था। हाय राम, वो नज़ारा कैसा था?

मेरी गांड जब पूरी नरम और फिसलन भरी हो चुकी थी, तभी करन मेरे पीछे आ लगा। एकदम ऐसे, मानो कोई उत्तेजित बैल अपनी गाय पर झपट पड़े।.

शायद बैल गाय की चूत में अपना लंड डालता हो, पर इस सांड ने मेरी तंग गांड में अपना घोड़े जैसा लंड भर दिया। मेरी गांड उछल-उछल कर उसके मोटे लंड को सह रही थी।.

अब तक दीपू की गाड़ी पूरी तरह तेज हो चुकी थी। वहीं करन का लंड मेरी गांड में बिना रुके धमाल मचा रहा था। सिर्फ राज बाहर बैठा देख रहा था। उसे ऐसे अकेले बैठे रहना पसंद नहीं आया। वह मेरे नीचे झुका, मेरी चूत में उंगली डाली। फिर धीमे से घुमाने लगा।.

मैं और भी नशे में डूब गई। मेरे मुँह में अवि का लंड था, साथ ही सौम्या भाभी के होंठों का स्वाद भी। पिछले हिस्से में करन का लंड घूम रहा था, आगे राज की उंगलियां चूत के अंदर खेल रही थीं। वो अपने मुँह से चूत को भी चाट रहा था। फिर किसी लड़की को इससे बढ़कर क्या चाहिए? बस ऐसे ही झटकों में चुदाई का सिलसिला…!

कौन जाने कितनी घंटों से ऐसा हो रहा था।.

लगता था, अवि सब कुछ छोड़कर जाने वाला है। मैं और भाभी उसका सामान उठाने के लिए तैयार खड़ी थीं।.

उसकी चीज़ दोनों के मुँह में जा चुकी थी। उनके होंठ लंड के साथ ऐसे चिपके रहे, मानो कहीं सिल दिए गए हों।.

उम्मीद है, तुम्हारे अंदर की चिंताएँ मेरी लिखी बातों से थोड़ी हलचल में पड़ गई हों।.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0